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Nandan Nilekani couple sign ‘Giving Pledge’, to donate half their wealth to philanthropy

“Our philanthropic journey of two decades has been led by Rohini’s passion and commitment!” Nilekani tweeted on Monday. Rohini is also the Co-Founder of EkStep, set up with her husband in 2014. EkStep is an education non-profit that is an open learning platform to improve and amplify learning opportunities for every child.

Bengaluru: Infosys co-founder Nandan Nilekani and his wife Rohini have signed the Giving Pledge, committing to give away half of their wealth. After Wipro’s Azim Premji, Kiran Mazumdar Shaw of Biocon and PNC Menon of Sobha Developers, they are the next set of billionaires in India to give away at least half of their wealth.

The Giving Pledge was pioneered by Bill Gates and Warren Buffet in 2010, who along with 40 billionaires across the globe, have committed most of their wealth for philanthropy and to help fight issues such as poverty and promote growth and equality.

The announcement comes after some of the world’s richest philanthropists created Co-Impact, a global model for collaborative philanthropy and social change at scale. Co-Impact will create a pool of all proceeds from philanthropists to invest $500 million in three critical areas, health, education, and economic opportunity, to improve the lives of the less-fortunate population across developing countries.

According to a report, Nandan and Rohini wrote in their pledge that wealth comes with a huge responsibility and is best deployed for the larger public interest. They added that their philanthropic efforts will be directed at societal platforms, which are open, technology-enabled ecosystems or nurturing networks.

Nandan and Rohini have been actively involved in philanthropy over the last two decades. In fact, Rohini, who runs a foundation Arghyam, focusing on water and sanitation issues, has been named in Forbes Asia’s annual list of Asia’s Heroes of Philanthropy in 2010. Her philanthropic work is in the areas of accountability, transparency & Governance, Arts & Culture, Civil Society & Intellectual Capacity, Civil Society Enablers, Access To Justice, Mental Health, Environment, Ecology & Conservation, Gender and Independent Media.

“Our philanthropic journey of two decades has been led by Rohini’s passion and commitment!” Nilekani tweeted on Monday. Rohini is also the Co-Founder of EkStep, set up with her husband in 2014. EkStep is an education non-profit that is an open learning platform to improve and amplify learning opportunities for every child.

She also co-founded and funded Pratham Books, a non-profit publisher of children’s books in 2014. Pratham Books has touched the lives of millions with its captivating, locally-set stories in multiple Indian languages.

Speaking to media on their pledge, they said, “Signing the Giving Pledge helps us join many people who are coming together and thinking about how to solve the world’s large problems.”

“Nandan and Rohini are not only a great example of generosity, they are also putting their time and energy into philanthropy. A lot of stuff they are doing is very catalytic. Philanthropy is tough. It forces you to think about your death. It requires a family to get to a certain point where they feel that giving makes sense for them. 171 people have signed the Giving Pledge. This is way beyond what we thought we would ever achieve,” Bill Gates told Economic Times.

Source: TNM

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प्रदेश में ऑरेंज-ग्रीन जोन में शुरू होगी इंडस्ट्री, रेड में भी चलाने के लिए केंद्र को लिखा

 केंद्र सरकार की ओर से 20 अप्रैल के बाद लॉकडाउन में दी जाने वाली छूट के लिए राज्य सरकार सीनियर अफसरों के साथ लगातार मंथन कर रही है कि कहां क्या छूट दी जाए। माना जा रहा है कि सरकार ने ग्रीन व ऑरेंज के साथ रेड जोन में भी इंडस्ट्री को शुरू करने के लिए हरी झंडी देने का मन बना लिया है। हालांकि कंटेनमेंट और बफर जोन में कोई गतिविधि नहीं शुरू की जाएगी। राज्य में 282 कंटेनमेंट-बफर जोन हैं। रेड जोन में शामिल गुड़गांव, नूंह, पलवल और फरीदाबाद में ही 214 कंटेनमेंट जोन हैं। सरकार की ओर से रेड जोन में भी इंडस्ट्री शुरू करने के लिए केंद्र को लिखा गया है।

Industry to start in Orange-Green zone in the state, wrote to the Center to run in Red as well

राज्य में कोरोना से ठीक होने वालों का औसत 31% 

राज्य के लिए राहत की बात यह है कि यहां कुछ ही इलाकों में कोरोना पॉजिटिव केस मिल रहे हैं, जबकि ठीक होने वालों का औसत 31% है। तीन जिलों में कोरोना का अब तक कोई केस सामने नहीं आया, जबकि 7 जिले कोरोनामुक्त हो चुके हैं। ऐसे में सरकार केंद्र की गाइड लाइन के अनुसार सभी जिलों को लेकर प्लानिंग कर रही है। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि ऑरेंज और ग्रीन जोन में इंडस्ट्री को शुरू किया जाएगा।

रेड जोन में शामिल गुड़गांव और फरीदाबाद में ही सबसे ज्यादा इंडस्ट्री

साथ ही रेड जोन के लिए भी केंद्र को लिखा गया है। रेड जोन में शामिल गुड़गांव और फरीदाबाद में ही सबसे ज्यादा इंडस्ट्री हैं। इसलिए रेड जोन में भी कुछ छूट देने की तैयारी में है। राज्य में छूट जिला स्तरीय कमेटियों की सिफारिश पर दी जाएगी। वहीं, पहले देखेंगी कि इंडस्ट्री में कोरोना से बचाव की सभी व्यवस्था है या नहीं। कमेटियां अपनी रिपोर्ट राज्य स्तरीय कमेटी को भेजेंगी, जहां से इसकी अप्रूवल मिलेगी। हालांकि बड़ी कंपनियों को छूट देने के लिए राज्य स्तरीय कमेटी ही फैसला करेगी।

  • आम लोगों के एक दर्जन से अधिक काम होंगे शुरू 

तहसीलों में शुरू हो सकेंगी रजिस्ट्रियां, एक दिन में 30

  • रजिस्ट्रियां शुरू होंगी। राजस्व रिकॉर्ड एवं पंजीकरण डीडी की प्रतियां दी मिलेंगी। म्यूटेशन होगा।
  • शपथ पत्रों का सत्यापन होगा। एससी और बीसी के प्रमाण पत्र बनाए जाएंगे। इनके लिए ई-अपाॅइंटमेंट दी जाएगी।
  • लॉकडाउन में ई-अपाॅइंटमेंट की अधिकतम सीमा 30 रहेगी।
  • इसमें से 50% ई-अपाॅइंटमेंट  ऑनलाइन व 50% तहसील एवं उप तहसील कार्यालयों द्वारा दी जाएंगी। पहले दी गई अपाॅइंटमेंट को रद्द किया जाएगा।
  • स्टेशनरी की दुकानें खुल सकती हैं
  • विद्यार्थियों को पुस्तक मिले, इसके लिए पुस्तकों या स्टेशनरी की दुकानें खोली जा सकती हैं।
  • विद्यार्थियों तक पुस्तकें पहुंचाने के लिए संभावना तलाशी जाएगी।
  • बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन शुरू होगा
  • बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन काम 20 के बाद शुरू किया जाएगा।
  • माइनिंग और ईंट भट्‌ठे पर काम शुरू होगा।

शुरू होगी ओपीडी, फोन पर ही मिलेगा टोकन नंबर

  • प्राइवेट अस्पतालों में शुरू हुई ओपीडी को लेकर हरियाणा मेडिकल काउंसिल की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिसके अनुसार इन अस्पतालों में सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक रोगियों की जांच होगी। इस दौरान लैब भी खुली रहेंगी।
  • जांच कराने वाले मरीजों को पहले फोन पर अस्पताल से अपने टोकन नंबर लेने पड़ेंगे, ताकि अस्पताल में भीड़ न लगे और सोशल डिस्टेसिंग का पूरा पालन हो सके।
  • अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं 24 घंटे जारी रहेंगी।
  • अस्पताल मैनेजमेंट की ओर से अस्पताल भवन के गेट पर मरीजों को मुफ्त मास्क दिए जाएं और उन्हें सैनिटाइज करने की व्यवस्था करें।
  • यदि किसी में कोरोना के लक्षण दिखें तो सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी जाए।
  • स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भी प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों से ओपीडी शुरू करने की अपील की थी। कहा था कि सरकारी अस्पतालों में भी ओपीडी शुरू होगी।

उद्योगों के लिए ये रहेंगे नियम

  • जिला स्तरीय समितियों का गठन होगा, जो ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर पास जारी करेंगी। आवश्यक सेवाएं से जुड़े लोगों को कोरोना से बचाने के लिए उनकी जांच होगी।
  • कोई श्रमिक एक स्थान से दूसरे स्थान पर कार्य करने जा रहा हो तो उसकी मेडिकल जांच होगी। कार्य-स्थल पर या उसके आप-पास ही श्रमिकों के सब-कैंप बनाए जा सकते हैं।
  • उद्योग विभाग हेल्पलाइन स्थापित की जाएगी। जहां उद्योगपति कॉल कर सकते हैं और पास बनवाने व अन्य प्रबंधों के बारे में जानकारी ले सकेंगे।
  • उपायुक्त निर्णय लेंगे कि कोई प्रतिष्ठान खुलेगा या नहीं। जिलों में औद्योगिक प्रक्रियाओं पर नजर रखने के लिए उद्योग विभाग के सचिव की देखरेख में मुख्यालय पर एक कमेटी बनाई जाएगी।
  • कंटेनमेंट जोन में आवश्यक वस्तुओं को बनाने वाले उद्योगों के लिए एक ‘त्रिकोणीय विशेष पास’ और गैर-कंटेनमेंट जोन के लिए ‘आयताकार साधारण पास’ जारी किया जाएगा।
  • उद्योगों को एक चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा, जिसमें स्वच्छता, मास्क का उपयोग और सोशल-डिस्टेंसिंग से संबंधित अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी।

किस जिले में बने कितने कंटेनमेंट-बफर जोन
सबसे ज्यादा कंटेनमेंट और बफर जोन नूंह में 140 बनाए गए हैं। जबकि पलवल में 52, सोनीपत में 3, करनाल में 3, फरीदाबाद 13, भिवानी में 2, चरखी दादरी में 7, गुड़गांव में 9, जींद में 7, फतेहाबाद में 2, पानीपत में 2, कैथल और झज्जर में एक-एक, पंचकूला में 23, सिरसा में 5, हिसार में एक, यमुनानगर में 4 और कुरुक्षेत्र में 7 जोन कंटेंनमेंट और बफर जोन हैं।

पंजाब: लुधियाना में कानूनगो की मौत, जालंधर में 1 साल के बच्चे समेत 7 लोग पॉजिटिव

जालंधर/ लुधियाना | पंजाब में काेराेना ने रफ्तार पकड़ ली है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन कोरोना से व्यक्ति की मौत हो गई। लुधियाना में पायल निवासी कानूनगो गुरमेल सिंह (58) ने अस्पताल में हार्ट अटैक के बाद दम तोड़ दिया। उन्हें 14 अप्रैल को भर्ती कराया था। वीरवार को रिपार्ट पॉजिटिव आने के 24 घंटे के भीतर उनकी मौत हो गई। अब तक 15 लोग दम तोड़ चुके हैं। शुक्रवार को 16 नए केस आए। इनमें जालंधर से 7, पटियाला और लुधियाना से 4-4 व फिरोजपुर से एक केस आया। आंकड़ा अब 215 हो गया है। पिछले 17 दिनों यानी 1 अप्रैल के बाद सूबे में 11 की मौत और 176 पॉजिटिव हो चुके हैं।

8 नए पॉजिटिव केस मिले, 18 ठीक होकर घर लौटे

प्रदेश में लगातार कोरोनावायरस के नए केस मिल रहे हैं, लेकिन अब मरीजों के ठीक होने का औसत नए केसों के मुकाबले बेहतर हो रहा है। शुक्रवार को नंूह में छह और पंचकूला में दो मरीज मिले, जबकि 18 मरीज राज्य में ठीक होकर घर लौटे हैं। पलवल में 7, नूंह में 3, फरीदाबाद, करनाल, सिरसा में दो-दो और चरखी दादरी और जींद में एक-एक मरीज ठीक हुआ है। राहत की बात यह है कि हरियाणा 22 में से तीन जिलों में अब तक कोरोना को रोकने में जहां सफल रहा है, वहीं अब छह जिले ऐसे हैं, जहां कोरोनावायरस पहुंचने के बावजूद अब वहां कोई संक्रमित नहीं है।

रोहतक में एक मरीज की जान भी गई

इन जिलों में यमुनानगर, सिरसा, फतेहाबाद, चरखी दादरी, भिवानी और रोहतक शामिल हैं। रोहतक में एक मरीज की जान भी गई है। बाकी सभी जिलों में कोरोना की जंग मरीजों ने जीती है। राज्य में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 212 तक पहुंच गई है। जबकि 72 लोग ठीक होकर घर लौटे हैं। इसके अतिरिक्त गुड़गांव में लाए गए इटली के 14 मरीज भी ठीक हुए हैं। राज्य में जो 212 मरीज मिले हैं, इनमें 116 से ज्यादा जमाती हैं। हरियाणा के लिए राहत की बात यह भी है कि प्रदेश में करीब 50 फीसदी लोगों ने क्वारेंटाइन का समय पूरा कर लिया है। प्रदेश में 28854 लोगों को अब तक क्वारेंटाइन किया गया। इनमें से 14030 लोगों का क्वारेंटाइन का समय पूरा हो चुका है। राज्य में 1408 मरीजों की रिपोर्ट का अब भी इंतजार है।

683 रिपोर्ट आई निगेटिव

राज्य में पिछले 24 घंटे में 683 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है, जबकि 789 ने सर्विलांस का पीरियड पूरा कर लिया। पिछले 24 घंटे में ही 380 लोगों को और सर्विलांस पर लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 820 नए सैंपल लिए हैं।

 पीजीआई में रोज 1000 की जांच होगी

  • स्वास्थ्य विभाग के एसीएस राजीव अरोड़ा ने बताया कि रोज 180 सैंपल की क्षमता वाला पीजीआईएमएस रोहतक 500 सैंपल की जांच करने में सक्षम है। जल्द इसकी क्षमता एक हजार होगी।
  • 10,000 रैपिड टेस्टिंग किट शीघ्र ही मिलने की उम्मीद है। इनका उपयोग गुड़गांव, फरीदाबाद, पलवल, नूंह व पंचकुला के हॉटस्पॉट क्षेत्र में होगा।

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WASHINGTON:Researchers in the US have used virtual reality (VR) for the first time to reveal how coronavirus attacks the lungs and kills people.

Such is the ferocity with which coronavirus can target the lungs, even otherwise healthy people can fall seriously ill – and could die.

The images, from George Washington University Hospital in Washington DC paint a stark picture of the potential impact of the COVID-19 disease, which can be so serious that even patients who survive may be left with lifelong breathing difficulties.

In these images, which were recreated from the university’s first COVID-19 patient in mid-March, the green areas show where the virus has damaged tissue in the lungs.

“There is such a stark contrast between the virus-infected abnormal lung and the more healthy, adjacent lung tissue,” explains Dr Keith Mortman, chief of thoracic surgery at GWHU.

“The damage that we’re seeing is not isolated to any one part of the lung.

“This is severe damage to both lungs diffusely.”

Such damage could come in the form of an illness such as pneumonia or acute respiratory distress syndrome (ARDS), which stops oxygen from reaching vital organs.

Normally oxygen would enter down the windpipe and head into the lungs, filling up air sacs that then enter red blood cells, which in turn circulate around the heart and the body.

ARDS would stop the oxygen before it gets to the lungs, starting a domino effect for the rest of the body.

GHWU has been using its so-called Surgical Theater VR technology since 2016 – it has previously been used for surgical planning and to educate patients.

The COVID-19 patient – a man in his late 50s – had mild symptoms (fever, cough, shortness of breath) to start with, but his condition deteriorated and he needed to be hospitalised and placed on a ventilator.

When his condition escalated further, he was transferred to GWUH for more intensive treatment called ECMO, which stands for extracorporeal membrane oxygeneration.

It sees blood removed from the body, infused with oxygen, and then returned to the body.

Speaking on GWHU’s coronavirus podcast, Dr Mortman said the damage shown in the images suggests COVID-19 could have long-lasting effects on its most critical victims.

He said: “It starts off as a viral infection, but you can see that it becomes severe inflammation in the lung, and when it does not subside it becomes scarring, creating long term damage.

“It could really impact somebody’s ability to breathe in the long term.”

Dr Mortman said that while the majority of people who get infected will recover well from minor symptoms or have no symptoms whatsoever, around 20% will develop more severe problems.

Hospital admission, intensive care treatment and ventilation could all follow.

“People who so far have not been heeding the warning of public health professionals can see these images and the destruction that’s being caused in the lungs, and why these patient’s lungs are failing to the point of needing a mechanical ventilator,” he said.

“Hopefully the public can see these images and start to understand why this situation is so serious and how this virus really is not discriminating among various people.”

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Not Hospitals, Home Treatments Can Be Key To Beating Coronavirus Spread


Health care systems across the globe are struggling to cope up with the wave of COVID-19 patients caused by the Coronavirus pandemic. No other country has seen the devastation caused in the wake of the Coronavirus disease as much as Italy.

Learning from the experience, doctors in the country believe that the long established health care system has failed in the situation and needs a drastic revamp, one where patients are treated at home instead of hospitals.

Almost a dozen physicians in Italy have appealed to their counterparts in other countries to take the health care to the communities instead of limiting the treatment to established hospitals. The suggestion stems from a study published by Mirco Nacoti, Luca Longhi, and their colleagues at Papa Giovanni XXIII Hospital in Bergamo, Italy.

Doctors patientsREUTERS

The Key Learnings

The physicians urge their counterparts in the US to learn from Italy’s condition and adapt an invariably different approach to treating patients with Coronavirus. They suggest the medical forces in the US to decentralise the health care system needs and focus on community interventions instead.

That might mean a home centred care for Coronavirus patients i.e. something like doctor house calls. The practice can possibly reduce the community spread of the disease by reducing the exposure of the COVID-19 patient to the outside world.

Home Care For Coronavirus Patients(REPRESENTATIVE IMAGE: REUTERS)

Interestingly, doctors mention that the treatment of COVID-19 at home is very much possible as no special medical equipment is required in most of the cases. Optimum nutrition through diet, steady breathing and Oxygen provision in case the patient has breathing difficulties is all that is required for most of the cases.

In bringing these remedial measures to the patient, a whole lot of chances of transmission of the disease can be avoided. In addition, such patients will not burden the already overburdened hospitals any further.

For patients that need more intensive care, dedicated Coronavirus medical centers should be used to deliver care.

The paper provides a thorough insight on the ground reality and how a key aspect in the equation can be modified to our benefit. With COVID-19 dedicated centres being set up in various hotspots around the globe, the idea might already have been brought to practice and should yield its results soon.

The Monumental Task

A humongous challenge for the health care officials at this point is to manage the available medical resources optimally to save as much lives as possible. Doctors have had to choose between patients to save at hospitals, citing limited number of critical life saving equipment like ventilators.

A similar condition is observed at the Papa Giovanni XXIII Hospital, a new state-of-the-art facility which is staggered under the COVID-19 caseload. “Our own hospital is highly contaminated, and we are far beyond the tipping point: 300 beds out of 900 are occupied by COVID-19 patients. Fully 70% of ICU beds in our hospital are reserved for critically ill COVID-19 patients with a reasonable chance to survive,” the paper written by the team of physicians mentions.

Home Care For Coronavirus Patients(REPRESENTATIVE IMAGE: REUTERS)

It further adds, “the situation here is dismal as we operate well below our normal standard of care. Wait times for an intensive care bed are hours long. Older patients are not being resuscitated and die alone without appropriate palliative care, while the family is notified over the phone, often by a well-intentioned, exhausted, and emotionally depleted physician with no prior contact.”

With the overburdened medical resources, even regular medical services like pregnancy care and child delivery have been affected like never before as hospitals near collapse. The paper paints a grim picture of the reality in Italy.

Another big challenge is that the novel Coronavirus disease might be spreading in hospitals from patient to patient. Reports of the disease being spread among the occupants of a hospital are coming to light and in such a case, hospitals can be considered as a hotspot and a possible source of transmission to the healthy, in the worst-case, to the health workers.

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